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हमारे बारे में

उच्च क्षमता वाले औषध उद्योग के विकास हेतु अधिकाधिक ध्यान संकेन्द्रित करने के लिए रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में वर्ष 2008 में 1 जुलाई को औषध विभाग बनाया गया था।

श्री अनंत कुमार, रसायन और उर्वरक मंत्री और श्री मनसुख एल मांडविया रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री हैं।

देश में फार्मा उद्योग के विकास को उत्प्रेरित करने के इस मंत्रालय को निम्नलिखित अधिदेश दिए गए हैं -

  • दवा एवं औषध क्षेत्र का विकास।
  • औषधीय क्षेत्र से संबंधित क्षेत्रों में बुनियादी, अनुप्रयुक्त एवं अन्य अनुसंधानों का संवर्धन और समन्वय।
  • औषध क्षेत्र के लिए अवसंरचना, जनशक्ति और कौशलों का विकास और संबंधित सूचना का प्रबंधन।
  • भारत और विदेशों में उच्च स्तरीय अनुसंधान सहित शिक्षा एवं प्रशिक्षण एवं फैलोशिप मंजूरी सहित, औषध क्षेत्र से संबंधित सभी मामलों में सूचना विनिमय और तकनीकी मार्गदर्शन।
  • औषध से संबंधित क्षेत्रों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का संवर्धन।
  • भारत और विदेशों के संबद्ध क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से संबंधित कार्य सहित औषध अनुसंधान के क्षेत्र में अन्तरराष्ट्रीय सहयोग।
  • औषध क्षेत्र में राष्ट्रीय खतरों से निपटने के लिए तकनीकी सहायता।
  • मूल्य नियंत्रण / निगरानी के संबंधित कार्यों सहित राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण से संबंधित सभी मामले।
  • राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों से संबंधित सभी मामले।
  • केन्द्रीय औषध सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों - बीसीपीएल, एचएएल, आईडीपीएल, केएपीएल और आरडीपीएल के विकास के लिए सहयोग।
  • चिकित्सा उपकरणों - पदोन्नति , उत्पादन और निर्माण से संबंधित उद्योग मुद्दों; विशेष रूप से अन्य विभागों को आवंटित उन लोगों को छोड़कर ।

इस अधिदेश के आधार पर, विभाग ने अपने लिए निम्नलिखित विजन निर्धारित किया है -

विभाग का विजन

  • भारत को वहनीय मूल्यों पर गुणवत्तायुक्‍त औषधियों का सबसे बड़ा वैश्विक प्रदाता बनाना।

इस विजन को निम्नलिखित मिशन को ध्यान में रखते हुए हासिल किया जाना है -

  • औषध उद्योग और औषध अनुसंधान और विकास के लिए मानव संसाधनों का विकास
  • औषद उद्योग के विकास के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से इंडियन फार्मा ब्रांड का संवर्धन करना
  • औषध उद्योग के पर्यावरणात्‍मक रूप से धारणीय विकास का संवर्धन करना।
  • दवाओं की उपलब्धता, सुगम्‍यता और वहनीयता बनाए रखना।

इस विजन और मिशन को कार्यान्वित करने के उद्देश्य से, विभाग के सृजन के साथ ही विभाग ने  औषध उद्योग के विकास को उत्प्रेरित करने के लिए निम्नलिखित पहले की हैं।

1. राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवंअनुसंधान संस्थान (नाईपर),मोहाली,चंडीगढ़
नाईपर,मोहाली राष्ट्रीय महत्व का एक प्रमुख संस्थान है,जिसकी स्थापना26जून, 1995को संसद के अधिनियम के तहत किया गया। यह संस्थान14 विषयों में पीएचडी डिग्री और मास्टर पाठ्यक्रम का प्रस्ताव करता है औरऔषध उद्योग की विभिन्न जरूरतों को पूरा करता है। वर्तमान में विदेशी नागरिक सहित601छात्र नाईपर,मोहाली में अध्ययन कर रहे हैं।छात्रों की संख्या बढ़ा दी गयी है,ताकि उद्योग के लिए,विशेष रूप से अनुसंधान एवं विकास और साथ ही उच्च स्तरीय फार्माप्रबंधन के लिए अधिक से अधिक कुशल कार्यबल उपलब्ध कराया जा सके।
2. नएनाईपरों की स्थापना
औषध क्षेत्र में अधिक कुशल मानव संसाधन कीउपलब्धता को और बढ़ाने के लिए सरकार ने 2005से पटना (हाजीपुर),हैदराबाद,अहमदाबाद,रायबरेली,गुवाहाटी और कोलकाता में छः नये नाईपरों की स्थापना की है। कौशल आधारके इस सशक्तीकरण सेऔषध आरएंडडी पर बढ़ेहुए फोकस के साथ औषध क्षेत्र की सतत संवृद्धि के लिए काफी कुशल मानव बल की बढ़तीमांग पूरी हो रही है। वर्तमान में,नये नाईपर इस प्रयोजनके लिए मनोनीत मेंटर संस्थानों जैसे भारतीय रसायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान,भारतीय रासायनिक जीव विज्ञान संस्थान,केन्द्रीय औषध अनुसंधान संस्थान,लखनऊ,राष्ट्रीय जैव विज्ञान संस्थान की सहायता से कार्य कर रहे हैं।
3. वहनीयमूल्यों पर गुणवत्तायुक्त औषधियों कीउपलब्धता- जन औषधि योजना
वहनीय मूल्यों पर गुणवत्तायुक्त दवाइयोंके लिए ‘जन औषधि अभियान’नामक अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य सभी को विशेषकरगरीब लोगों और उपेक्षित लोगों को वहनीय मूल्यों पर दवाइयां उपलब्ध कराना है। इसअभियान के तहत,जन औषधि स्टोर के माध्यम से कम मूल्य कीगुणवत्तायुक्त ब्रांड रहित जेनरिक दवाइयां उपलब्ध कराई जाती है। वर्तमान में,पंजाब,हरियाणा उत्तराखंड,ओडिशा,राजस्थान,आंध्रप्रदेश,पश्चिम बंगाल,जम्मू एवं कश्मीर राज्यों एवं चंडीगढ़ एवं दिल्ली केन्द्रशासित प्रदेशों में107जेएएस खोले गए हैं (दिनांक12.08.2011 तक)।
4. औद्योगिकक्षमता वर्धन
एसएमई फार्मा उद्योग के गुणता परकविनिर्माण के लिए,विभाग ने सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्योगमंत्रालय की मदद से अनुसूची-एम मानक के तकनीकी उन्नयन के लिए वित्तीय सहायताउपलब्ध करवाने के लिए एमएसएमई मंत्रालय द्वारा परिचालित ऋण संबद्ध सब्सिडी योजना (सीएससीएसएस) का विस्तार किया गया है। संयंत्र/मशीनरी के140से अधिक मदों को सहायता योग्य पात्र उपस्कर सूची में जोड़ा गया है। अबविभाग ने डब्लयूएचओ-जीएमपी,यूएसएफडीए और अन्यअंतर्राष्ट्रीय मानक विनिर्माण अनुपालनों के लिए एमएसएमई को वित्तीय सहायता की एकयोजना का प्रस्ताव किया है।
5. परियोजनाऔर योजना
औषध क्षेत्र के लिए क्लस्टर विकास कार्यक्रम (सीडीपी-पीएस)
औषध क्षेत्र को उत्‍प्र‍ेरित करने के लिए और गुणवत्ता, उत्पादकता और नवाचार को बढावा देने तथा प्रतिस्पर्धात्मक वैश्विक बाजार में एक अग्रणी भूमिका अदा करने हेतु भारतीय औषध उद्योग, विशेष रूप से एसएमई को सक्षम बनाने के उद्देश्य से माननीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री ने दिनांक 27.10.2014 को औषध क्षेत्र के लिए कलस्टर विकास कार्यक्रम (सीडीपी-पीएस) शुरू किए जाने को मंजूरी दी।

सीडीपी-पीएस एक केन्द्रीयक्षेत्र की योजना है। इस योजनाके कुल व्यय को सीडीपी-पीएस के लिए 12वी पंचवर्षीय योजना के लिए 125 करोड़ रुपए के रूप में प्रस्तावित किया गया है।

इस स्कीम को सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) प्रारूप में एक मुश्त सहायता अनुदान के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा जिसकी निर्मुक्ति साझे सुविधा केन्द्रों (सीएफसी) के रूप में पहचान की गई अवसंरचना और सामान्य सुविधाओं के सृजन के लिए विभिन्न चरणों में इस प्रयोजन के लिए स्थापित विशेष प्रयोजन माध्यमों (एसपीवी) को की जानी है।

सामान्य सुविधाओं के निर्माण के लिए इस स्कीम के तहत 20.00 करोड़ रुपए प्रति क्लस्टर या परियोजना की लागत का 70% जो भी कम हो, की सहायता प्रदान की जाएगी।

सामान्य सुविधाओं के अन्तर्गत कुछ निर्देशात्मक कार्यकलाप इस प्रकार हैं:-

  • सामान्य जांच सुविधाएं
  • प्रशिक्षण केन्द्र
  • ऐंफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट
  • अनुसंधान एवं विकास केन्द्र
  • सामान्य प्रचालन केन्द्र

पीपीडीएस योजना

औषध संवर्धन विकास स्कीम (पीपीडीएस) का लक्ष्य निर्यात एवं साथ ही निवेश को बढावा देने, वृद्धि, निर्यात एवं साथ ही औषध क्षेत्र को प्रभावित करने वाले गम्भीर मुद्दों पर ध्यान देने हेतु अध्ययन/विचार विमर्श आयोजित करने के लिए सेमीनार, सम्मेलनों, प्रदर्शनियों, भारत आने एवं जाने वाले प्रतिनिधि मंडलों  के आयोजन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके औषध क्षेत्र में संवर्धन, विकास एवं निर्यात को बढावा देना है। पीपीडीएस के तहत, औषध विभाग स्वयं या फिर जीएफआर,2005 के नियम 206 में यथा उल्लिखित संस्थानों, संगठनों, स्वैच्छिक संगठनों या गैर सरकारी संगठनों को अनुदान सहायता के रूप में वित्तीय सहायता के माध्यम से निम्‍नलिखित कार्य करता है :

i) औषध उद्योग के विकास से संबंधित मुद्दों/विषयों पर प्रशिक्षण/ ज्ञान वर्धक कार्यक्रम/कार्यकलाप आयोजित करता है। विषयों की एक निर्देशात्मक सूची इस प्रकार है:

(क) गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली / गुणवत्ता विकास कार्यक्रम

(ख) यूएसएफडीए नोटिस पर किस प्रकार कार्रवाई करें ?

(ग) सफलता गाथा प्रस्तुति – औषध उद्यमी

(घ) संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ बनाम भारत में नैदानिक परीक्षणों के लिए सरकारी विनियम / दिशानिर्देश

(ङ) अपशिष्ट प्रबंधन