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चिकित्सीय उपकरण

चिकित्सीय उपकरणों का उद्योग एक बहुउत्पादीय उद्योग है जिसमें विभिन्न प्रकार के उत्पादों का उत्पादन किया जाता है। चिकित्सीय उपकरणों के निर्माण तथा कारोबार में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दहाई अंक वृद्धि दरें स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में इसकी महत्ता का द्योतक है। चिकित्सीय उपकरण उद्योग ज्यादातर आयात पर निर्भर है। अधिकतर हाईटेक अभिनव उत्पाद और प्रौद्योगिकी एक सुविकसित पारिस्थितिकी-तंत्र एवं अभिनव चक्र के सृजित होती है जिसे घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए भारत में विकसित किए जाने की आवश्यकता है।

यह अनुमान है कि चिकित्सीय उपकरण के वैश्विक बाजार का आकार 220 बिलियन अमरिकी डॉलर से बड़ा है। कुल चिकित्सीय उपकरण के बाजार में लगभग 40% चिकित्सीय डिस्पोजेबल्स, 18% नेत्र उपकरणों, 16% इमेजिंग तथा अन्य उपकरणों, 12% निदान उपकरणों तथा 8% दंत-चिकित्सीय उपकरणों का हिस्सा है। चिकित्सीय उपकरण के वैश्विक बाजार में सबसे प्रबल हिस्सा 45% के साथ अमेरिका का है तथा 30% हिस्सेदारी के साथ यूरोपीय बाजार द्वितीय तथा 10% हिस्सेदारी के साथ जापान तृतीय स्थान पर है। वर्तमान में भारतीय चिकित्सीय उपकरण उद्योग को लघु एवं मध्यम उद्यम श्रेणी में विभाजित किया गया है जो कि मुख्य रूप से डिस्पोजेबल्स/चिकित्सीय आपूर्ति के उत्पादों का निर्माण कर रहा है। उच्च स्तर के चिकित्सीय उपकरणों की आपूर्ती बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा पूर्ण की जा रही है। यह अनुमान है कि देश में लगभग 800 विनिर्माता हैं और उनके कारोबार के आधार पर उनकी उद्योग प्रोफाइल तालिका-I में नीचे दी गई है:-

चिकित्सा उपकरण
टर्नओवर विवरण % में
0-10 करोड़ 65
10-50 करोड़ 25
50-100 करोड़ 5
100-500 करोड़ 3
500 करोड़+ 2
स्रोत: भारतीय चिकित्सा उपकरण उद्योग संघ (ए.आई.एम.ई.डी.)

भारत में चिकित्सीय उपकरण उद्योग मुख्य रूप से आयात पर निर्भर करता है अर्थात् 65% कारोबार का आधार आयात है। घरेलू उद्योग कंपनियां साधारणतः कम मूल्य तथा ज्यादा मात्रा में बिकने वाले उपकरणों का कारोबार करती हैं जहां गहन प्रतिस्पर्धा है। एम.एन.सी. लो-टेक उपकरणों के बाजार में कार्यरत नहीं है जहां स्थानीय विनिर्माता गहन मूल्य प्रतिस्पर्धा में उलझे रहते हैं। दूसरी ओर एक अच्छी बात सामने आयी वो ये कि कुछ विनिर्माण कंपनियां बाजार में अपनी पकड़ बनाने से ज्यादा बाजार सृजन की ओर अपना ध्यान केंद्रित कर रही हैं। बाजार की छोटी-छोटी जरूरतों के अनुसार वे नए तथा अभिनव उत्पादों का आविष्कार कर रही हैं।

वर्ष 2011-12 से 2014-15 तक की अवधि के दौरान चिकित्सीय उपकरणों के आयात-निर्यात दोनों में प्रतिवर्ष 10% से ज्यादा की दर से बढ़ोतरी हुई है।

भारत के अन्य विनिर्माण उद्योगों की तुलना में चिकित्सीय उपकरण क्षेत्र छोटा है, हालांकि भारत विश्व के चिकित्सीय उपकरणों के बीस सबसे बड़े बाजारों में से एक है तथा एशिया में जापान, चीन तथा दक्षिण कोरिया के बाद चौथे स्थान पर है। यद्यपि परिशुद्ध आंकड़े उपलब्ध नहीं है, तब भी लगभग 60,000-70,000 करोड़ रुपए तक के खुदरा बाजार का सुविज्ञ अनुमान लगाया जा सकता है।

विभिन्न सूत्रों का मानना है कि इलेक्ट्रोनिक चिकित्सीय उपकरणों का उद्योग, जो कि वर्ष 2009 में 850 मिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक था, वह प्रतिवर्ष 17% सी.ए.जी.आर. की दर से विकसित होकर वर्ष 2015 में लगभग 2 बिलियन अमरीकी डॉलर से ऊपर पहुंच जाएगा। यह आशा है कि यह वृद्धि दर न केवल बनी रहेगी बल्कि इसमें 17% से अधिक की बढ़ोतरी हो सकती है।

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चिकित्सा उपकरणों के घरेलू उत्पा दन का संवर्धन करना